मैं कभी टैटू बनवा पाई, तो यही गुदवाउंगी। यह फ़्रेज़ मार्गरेट ऐटवूड के उपन्यास 'द हैंडमेड्स टेल' से है। हालांकि ऐसे लैटिन दिखने वाले इस फ़्रेज़ का कुछ भी मतलब नहीं, पर किताब में इसका मतलब है। इसका मतलब है - Don't let the bastards grind you down. इस फ़्रेज़ का मतलब भी किताब में काफी देर बाद पता चलता है और इसे जानने की उत्सुकता भी अजब थी। 1985 में लिखी गई यह किताब जॉर्ज अॉर्वेल की किताब 'ऐनिमल फ़ार्म' की ही तरह एक काल्पनिक दुनिया की कहानी कहती है। यह दुनिया औरतों के लिए नरक है। बल्कि यह साशकों के अलावा सबके लिए नरक है। पढ़ते हुए इतनी इंट्रीगिंग लगी यह किताब कि लगा ही नहीं कि यह कोई मेरी कल्पना के परे की दुनिया है, जिसका वास्तविकता से कोई वास्ता नहीं। बल्कि कहानी की नायिका 'अॉफ़रेड (Offred)' की बातें, उसका डर, उसकी इच्छाएं हर औरत के क़रीब लगी। और जिस व्यवस्था की चर्चा है इसमें, वह व्यवस्था भी वास्तविकता से कोसों दूर की चीज़ न लगी।
द रिपब्लिक अॉफ़ गिलिअड में डिवॉरसेज़ इललीगल है। इसलिए दूसरी शादियों को नल कर दिया गया है। अॉफ़रेड, जिसका असली नाम उपन्यास के अंत तक पता नहीं चलता, का पति पहले से शादीशुदा था जब इनका अफ़ेयर शुरु हुआ। सब कुछ सही था। ज़िन्दगी टेक्नोलॉजी से लैस थी और औरतें ख़ुद को आज़ाद कह पाने की स्थिति में थीं। कि अचानक से प्रेसिडेंट की हत्या हो जाती है और गवर्नेंस का पूरा ढांचा ही बदल जाता है। नायिका अब किसी की बीवी नहीं रहती। उसे द रेड सेंटर में ले जाया जाता है जहाँ उसे बच्चे जनने की मशीन में तबदील करने की प्रक्रिया शुरू होती है। इन औरतों को अब हैंडमेड्स बुलाया जाता है। ये उन कमांडर्स के घरों में रिक्रूट की जाती हैं जिनकी बीवियों को बच्चे नहीं हो सकते। इनका समय-समय पर ट्रांसफर होते रहता है तबतक जबतक कि ये ख़ुद बच्चे पैदा करने लायक बनी रहें। ये औरतें फ़ोर्सड सरोगेट्स की तरह काम करती हैं।
इनसे कोई ग़लती हो जाए तो ग़लती की सज़ा मौत या फ़ोर्सड ऐंड लीगल प्रॉस्टिट्यूशन है। या हो सकता है इन्हें 'कॉलनीज़' भेज दिया जाए जहाँ के मैले वातावरण में ये यूँ ही मर जाएंगी। यह दौर युद्ध और मशीनीकरण के चरम का दौर है। औरतों को बच्चे नहीं होते। बच्चे हो गए तो उनका जीना मुश्किल है। अक्सर बच्चे शारीरिक कमियों के साथ पैदा होते हैं। जिन्हें किसी काम का नहीं समझा जाता। इसलिए बच्चे जनना इस दौर का महानतम कार्य है। यहाँ रिलिजन के सहारे क्रूरता को जस्टिफ़ाई किया जाता है।
जिस दिन कमांडर अपनी हैंडमेड के साथ सेक्स करता है उसे 'सेरेमॉनी' का दिन कहतेे हैं और वहाँ बिस्तर पर उसकी वाइफ़ भी मौजूद होती है। सेरेमॉनी पर्फ़ॉम करने का तरीका भी मन ख़राब कर देता है। किताब में एक जगह कनफ़ेशन चल रहा है। अभी नायिका ट्रेनिंग सेंटर में ही है। हैंडमेड्स को हर हफ़्ते कुछ कंफ़ेस करना होता है। जनीन नाम की लड़की अभी कुछ कंफ़ेस कर रही है। वह अपने साथ अपने ही दोस्तों द्वारा हुए रेप के बारे में बता रही है। जब उसकी बात ख़त्म होती है तो आंट लिडिया यानी कि ट्रेनिंग सेंटर की हेड, हैंडमेड्स की तरफ देख पूछती है - Who's fault was it? इसपर सारी हैंडमेड्स को एक साथ बोलना है - Her fault! Her fault! Her fault! यह पढ़ते हुए लगा कि इसमें क्या कल्पना। हमारे नेता और हमारा समाज भी रोज़ कह रहे हैं कि रेप औरतों की गलती है। ऐसे ही तमाम चीज़ें रिलेटेबल लगती है किताब में। कितनी ही लाइनें हैं जो अंडरलाइन करने का जी होता है। नायिका हर क्रूरता को झेलते हुए भी अपनी पुरानी दुनिया की वापसी के इंतज़ार में है। ऊपर लिखा यह फ़्रेज़ उसे अपनी हिम्मत बचाए रखने में मदद करता है। किताब ख़त्म करने के बाद मैंने द हैंडमेड्स टेल सीरीज़ का पहला सीज़न डाउनलोड किया। किताब के हिसाब से सीरीज़ में घटनाओं के क्रम इधर-उधर हैं। मैंने अभी पहला सीज़न भी ख़त्म नहीं किया। इसका दूसरा सीज़न भी है। सीरीज़ देखना ज़्यादा टाइम कंज्यूमिंग है, इसलिए मुझे लगता है किताब मंगाकर पढ़ लो। लड़कियों को पढ़नी चाहिए। सीरीज़ देख सको तो वह भी देख लो।
द रिपब्लिक अॉफ़ गिलिअड में डिवॉरसेज़ इललीगल है। इसलिए दूसरी शादियों को नल कर दिया गया है। अॉफ़रेड, जिसका असली नाम उपन्यास के अंत तक पता नहीं चलता, का पति पहले से शादीशुदा था जब इनका अफ़ेयर शुरु हुआ। सब कुछ सही था। ज़िन्दगी टेक्नोलॉजी से लैस थी और औरतें ख़ुद को आज़ाद कह पाने की स्थिति में थीं। कि अचानक से प्रेसिडेंट की हत्या हो जाती है और गवर्नेंस का पूरा ढांचा ही बदल जाता है। नायिका अब किसी की बीवी नहीं रहती। उसे द रेड सेंटर में ले जाया जाता है जहाँ उसे बच्चे जनने की मशीन में तबदील करने की प्रक्रिया शुरू होती है। इन औरतों को अब हैंडमेड्स बुलाया जाता है। ये उन कमांडर्स के घरों में रिक्रूट की जाती हैं जिनकी बीवियों को बच्चे नहीं हो सकते। इनका समय-समय पर ट्रांसफर होते रहता है तबतक जबतक कि ये ख़ुद बच्चे पैदा करने लायक बनी रहें। ये औरतें फ़ोर्सड सरोगेट्स की तरह काम करती हैं।
इनसे कोई ग़लती हो जाए तो ग़लती की सज़ा मौत या फ़ोर्सड ऐंड लीगल प्रॉस्टिट्यूशन है। या हो सकता है इन्हें 'कॉलनीज़' भेज दिया जाए जहाँ के मैले वातावरण में ये यूँ ही मर जाएंगी। यह दौर युद्ध और मशीनीकरण के चरम का दौर है। औरतों को बच्चे नहीं होते। बच्चे हो गए तो उनका जीना मुश्किल है। अक्सर बच्चे शारीरिक कमियों के साथ पैदा होते हैं। जिन्हें किसी काम का नहीं समझा जाता। इसलिए बच्चे जनना इस दौर का महानतम कार्य है। यहाँ रिलिजन के सहारे क्रूरता को जस्टिफ़ाई किया जाता है।
जिस दिन कमांडर अपनी हैंडमेड के साथ सेक्स करता है उसे 'सेरेमॉनी' का दिन कहतेे हैं और वहाँ बिस्तर पर उसकी वाइफ़ भी मौजूद होती है। सेरेमॉनी पर्फ़ॉम करने का तरीका भी मन ख़राब कर देता है। किताब में एक जगह कनफ़ेशन चल रहा है। अभी नायिका ट्रेनिंग सेंटर में ही है। हैंडमेड्स को हर हफ़्ते कुछ कंफ़ेस करना होता है। जनीन नाम की लड़की अभी कुछ कंफ़ेस कर रही है। वह अपने साथ अपने ही दोस्तों द्वारा हुए रेप के बारे में बता रही है। जब उसकी बात ख़त्म होती है तो आंट लिडिया यानी कि ट्रेनिंग सेंटर की हेड, हैंडमेड्स की तरफ देख पूछती है - Who's fault was it? इसपर सारी हैंडमेड्स को एक साथ बोलना है - Her fault! Her fault! Her fault! यह पढ़ते हुए लगा कि इसमें क्या कल्पना। हमारे नेता और हमारा समाज भी रोज़ कह रहे हैं कि रेप औरतों की गलती है। ऐसे ही तमाम चीज़ें रिलेटेबल लगती है किताब में। कितनी ही लाइनें हैं जो अंडरलाइन करने का जी होता है। नायिका हर क्रूरता को झेलते हुए भी अपनी पुरानी दुनिया की वापसी के इंतज़ार में है। ऊपर लिखा यह फ़्रेज़ उसे अपनी हिम्मत बचाए रखने में मदद करता है। किताब ख़त्म करने के बाद मैंने द हैंडमेड्स टेल सीरीज़ का पहला सीज़न डाउनलोड किया। किताब के हिसाब से सीरीज़ में घटनाओं के क्रम इधर-उधर हैं। मैंने अभी पहला सीज़न भी ख़त्म नहीं किया। इसका दूसरा सीज़न भी है। सीरीज़ देखना ज़्यादा टाइम कंज्यूमिंग है, इसलिए मुझे लगता है किताब मंगाकर पढ़ लो। लड़कियों को पढ़नी चाहिए। सीरीज़ देख सको तो वह भी देख लो।
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